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नरेंद्र मोदी और बनाम ?

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एक और पूरा साल बीत गया है और अगर और बचे दिनों को छोड़ दें तो लगभग चार साल का अरसा बीत गया है,चार साल पहले ही देश मे नई सरकार ने क़दम रखा था और ये सरकार प्रचंड बहुमत के साथ आई थी और इसक...

"ग़ालिब" का है अंदाज़े बयाँ और...

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पुरानी दिल्ली गली कासिम जान की तंग गलियों से निकलता रास्ता और उसमें लंबी टोपी सर पर लगा कर कमर को झुकाएं चलने वाले मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग खान जिनका तखल्लुस "ग़ालिब" था,और सारी दुनिया इन्हें "मिर्ज़ा ग़ालिब" के नाम से जानती है इनकी पैदाइश आज ही के दिन हुई थी।  "वो पूछते है हमसे की ग़ालिब कौन है अब तुम ही बतलाओ की बताएं क्या" मिर्ज़ा ग़ालिब की शख्सियत और उनकी पहचान को अगर उन्ही के शेर से बताया जाए तो यही शेर उनकी शख्सियत पर और उनके रुबाब भरे लहजे पर बिल्कुल सटीक बैठता है,मिर्ज़ा ग़ालिब की पैदाइश आज ही के दिन हुई,वो 1797 को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मे जहां से वो दिल्ली आ गए। मिर्ज़ा ग़ालिब की शख्सियत उनकी शायरी ही से बयान होती है जिसमे दर्द है,रुमानियत है मोहब्बत है और बयान है हर एक चीज़ का जो उन्होंने महसूस की और हासिल की,फिर चाहे उनकी औलादो के इन्तेक़ाल की खबर हो या अपने हाल पर हो मिर्ज़ा ग़ालिब ने हर एक मौके पर शायरी की है। "बाज़ीचा ए अतफाल है दुनिए मेरे आगे  होता है शबो रोज़ तमाशा मेरे आगे" बाज़ीचा ए अतफाल यानी बच्चों के खेलने का मैदान...

"फेक न्यूज़" और सोशल मीडिया.

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"फेक न्यूज़" इस शब्द के शाब्दिक अर्थ पर यदि गौर करें तो ये "उल्लू बनाना" नज़र आता है और न्यूज़ यानी खबर ऐसी खबरें जो "उल्लू बनाने" के काम आ सकें,अब अगर गौर करें तो देखने मे ये आएगा कि कौन किसे और क्यों "उल्लू बना" रहा है? यानी फेक न्यूज़ दिखा रहा है? इस बात की बुनियादी वजह राजनीतिक और मानसिक धारणा को मजबूत करना है और इसके लिए अलग अलग हथकंडे अपनाने से जुड़ी है। "फेक न्यूज़" ये वो दांव है जिसके द्वारा एक आबादी को,एक बहुत बड़ी तादाद को बहुत आसानी से "भीड़" में तब्दील किया जा सकता है। इसके बाद आपकी मानसिकता में ज़हर भरा जाता है। इसके बाद एक नफरत कि चिंगारी को धीरे धीरे बढाया जाता है और आपको "उत्तेजित" किया जाता है और एक शक्ल आपके "दुश्मन" की,आपके "समुदाय" के दुश्मन की या आपके "समुदाय" के दुश्मन की भावना कब आपके भीतर आ जाती है आप समझ ही नही पातें है और ये सब करती है "फेक न्यूज़"। फेक न्यूज का "कारोबार" जो अब तरक्की कर रहा है असल में ये इक्कीसविं सदी की शुरुआत यानी 31 दिसम्...

अटल जी "अटल" थे ?

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अटल जी, आप राजनीती के "अटल" है,आप बेहतरीन वक़्ता हुआ करते थे,आपने देश के "कारगिल" विजय कराया,आपने बिना "कांग्रेस" वाली सरकार पांच साल चलाकर दिखाई,बहुत बड़ी हिम्मत चाहिए होती है इसम...

"सॉफ्ट हिंदुत्व" नुकसान देह रहा ।

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गुजरात चुनाव के परिणाम आ गए है,चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार भाजपा को बहुमत मिला है और भाजपा के राष्ट्रीय अध्य्क्ष ने वहां सरकार बनाने के ऐलान कर दिया है । भाजपा छठी बार ल...

सोनिया गांधी होने का मतलब...

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कांग्रेस में "सोनिया युग" खत्म हो गया,और कांग्रेस में ही क्यों देश मे ही सोनिया युग खत्म हो गया,क्योंकि सोनिया गांधी सिर्फ कांग्रेस की नेता नही रही,देश की नेता रही है,और सिर्फ कांग्रेस की अध्यक्ष नही रही है,देश के प्रधानमंत्री पद की दावेदार रही हैं । सोनिया गांधी ने आज नम आंखों में भरी खुशी के साथ अपने सुपुत्र राहुल गांधी को अध्यक्ष पद का दारोमदार दे दिया है । ये इतिहास को बदलने जैसा है क्योंकि 19 बरस तक कांग्रेस को अपनी रणनीतियों के तहत चलाने वाली सोनिया गांधी याबी अध्यक्ष पद से हट गई है । सोनिया गांधी असल मे उस कद की नेता है जो 1998 के कांग्रेस के बुरे दौर में उसका अध्य्क्ष पद का भार सम्भाला था, जब कांग्रेस भाजपा के सामने कही नही टिकती थी,अटल बिहारी वाजपेयी देश के सर्वप्रिय नेता थे और उनका सानी कोई नही था । लेकिन सोनिया ने इस चुनोती को स्वीकार किया और अध्यक्ष पद का भार सम्भाला था । इसके बाद सोनिया गांधी की अध्यक्षता और उन्ही की ही रणनीति के बदौलत कांग्रेस आगे बढ़ी और अटल बिहारी वाजपेयी के "इंडिया शाइनिंग" नारे को अपनी रणनीति के दम पर हराने का दम खम दिखाया । ये बा...

क्या ये "भारत" की तस्वीर है

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क्या ये "भारत" की तस्वीर है? ऐसी तस्वीर जो इंसान की चींखों पर गौर न करें,रोती बिलखती,आवाज़ों पर गौर न करें,रहम न करें नज़र भी घुमाएं,न उसकी तरफ देखें जिसके लिए उसके दिल मे नफरत भरी है,इतनी नफ़रत की की लोहे का औज़ार से सिर पर वार करते हुए अपमी आप को शांति दे? क्यों वो ये भूल रहा है कि वो एक 50 साल का आदमी है ऐसा आदमी जो गरीब है किसान है,कमज़ोर है,और उस पर वो हमले क्यों कर रहा है? बस वो एक ही काम करता है और उस शख्स के टुकड़े टुकड़े कर देता,और उसे आग लगा देता है? (तस्वीर बीबीसी हिंदी) क्या कुछ देर रुक कर सोचना नही चाहिए इस बात पर की ये क्या हुआ? क्या एक इंसान की जान नही चली गयी,क्या मारने वाले के अंदर "आत्मा" बची नही? शायद नही क्योंकि इंसानी जिस्म ये "हैवानी" काम कर ही नही सकता है,लेकिन ऐसा काम हुआ है वो भी बुद्ध और गांधी की ज़मीन पर मर्यादा पुरूषोत्तम की ज़मीन पर "वी दा पीपल्स ऑफ इंडिया" कहने वाले संविधान की ज़मीन पर, की एक इंसान को काट दिया गया। राजस्थान के राजसमन्द जिले में बुधवार को एक व्यक्ति की हत्या कर वीडियो वायरल किया गया और बताया गया कि ...