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सोनिया गांधी होने का मतलब...

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कांग्रेस में "सोनिया युग" खत्म हो गया,और कांग्रेस में ही क्यों देश मे ही सोनिया युग खत्म हो गया,क्योंकि सोनिया गांधी सिर्फ कांग्रेस की नेता नही रही,देश की नेता रही है,और सिर्फ कांग्रेस की अध्यक्ष नही रही है,देश के प्रधानमंत्री पद की दावेदार रही हैं । सोनिया गांधी ने आज नम आंखों में भरी खुशी के साथ अपने सुपुत्र राहुल गांधी को अध्यक्ष पद का दारोमदार दे दिया है । ये इतिहास को बदलने जैसा है क्योंकि 19 बरस तक कांग्रेस को अपनी रणनीतियों के तहत चलाने वाली सोनिया गांधी याबी अध्यक्ष पद से हट गई है । सोनिया गांधी असल मे उस कद की नेता है जो 1998 के कांग्रेस के बुरे दौर में उसका अध्य्क्ष पद का भार सम्भाला था, जब कांग्रेस भाजपा के सामने कही नही टिकती थी,अटल बिहारी वाजपेयी देश के सर्वप्रिय नेता थे और उनका सानी कोई नही था । लेकिन सोनिया ने इस चुनोती को स्वीकार किया और अध्यक्ष पद का भार सम्भाला था । इसके बाद सोनिया गांधी की अध्यक्षता और उन्ही की ही रणनीति के बदौलत कांग्रेस आगे बढ़ी और अटल बिहारी वाजपेयी के "इंडिया शाइनिंग" नारे को अपनी रणनीति के दम पर हराने का दम खम दिखाया । ये बा...

क्या ये "भारत" की तस्वीर है

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क्या ये "भारत" की तस्वीर है? ऐसी तस्वीर जो इंसान की चींखों पर गौर न करें,रोती बिलखती,आवाज़ों पर गौर न करें,रहम न करें नज़र भी घुमाएं,न उसकी तरफ देखें जिसके लिए उसके दिल मे नफरत भरी है,इतनी नफ़रत की की लोहे का औज़ार से सिर पर वार करते हुए अपमी आप को शांति दे? क्यों वो ये भूल रहा है कि वो एक 50 साल का आदमी है ऐसा आदमी जो गरीब है किसान है,कमज़ोर है,और उस पर वो हमले क्यों कर रहा है? बस वो एक ही काम करता है और उस शख्स के टुकड़े टुकड़े कर देता,और उसे आग लगा देता है? (तस्वीर बीबीसी हिंदी) क्या कुछ देर रुक कर सोचना नही चाहिए इस बात पर की ये क्या हुआ? क्या एक इंसान की जान नही चली गयी,क्या मारने वाले के अंदर "आत्मा" बची नही? शायद नही क्योंकि इंसानी जिस्म ये "हैवानी" काम कर ही नही सकता है,लेकिन ऐसा काम हुआ है वो भी बुद्ध और गांधी की ज़मीन पर मर्यादा पुरूषोत्तम की ज़मीन पर "वी दा पीपल्स ऑफ इंडिया" कहने वाले संविधान की ज़मीन पर, की एक इंसान को काट दिया गया। राजस्थान के राजसमन्द जिले में बुधवार को एक व्यक्ति की हत्या कर वीडियो वायरल किया गया और बताया गया कि ...

सवाल "कानून" का है...

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आज 6 दिसम्बर है आज की तारीख का इतिहास आज़ाद भारत के इतिहास में हमेशा याद किया जायेगा,और जब जब इतिहास लिखा जायेगा और इतिहास में इस तारीख का ज़िक्र होगा तो सवाल ज़रूर होगा की संवेध...

रहमत दुनिया के लिए...

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रबिउल्लअव्वल के महीने का 12रवां दिन गवाह है एक ऐसी शख़्सियत की पैदाइश का जो तमाम इंसानियत के लिए रहमत बन कर आये,जिस शख़्सियत ने अपने हुस्न ए अख़लाक़ की वजह से अपने विरोध करने वाले तक को अपना क़ायल कर लिया,अपनी क़ाबिलियत के दम पर लोगों को अपने मॉड्यूल के साथ बा अख़लाक़,तक़वे,क़वानीन और बेहतरीन पॉलिसी को लेकर लोगों के सामने रखा और इसी तरह मज़हब ए इस्लाम के ज़रूरी बिंदुओं को तमाम दुनिया के सामने और एक बहतरीन मॉड्यूल सामने रखा ,ये शख़्सियत कोई और नही ये है पैग़म्बर मुहम्मद(स.अ) जिन्हें तमाम दुनिया के लिए रहमत भी कहा जाता है,पैग़म्बर मुहम्मद वो शख़्सियत है जो एक अँधेरी गुफा में चमकदार रौशनी की तरह है. इस बात को सिर्फ बताने के लिए नही कहा जाता है बल्कि इस के पीछे वजह है पैग़म्बर मुहम्मद के हर इंसान से जुड़े खाने पीने,रहने,सोने,ज़िन्दगी,मौत,शादी सेक्स,बच्चे,परिवार और सबसे ज़रूरी औरतों के बारे में तरीक़ों का ये बात इसलिए भी अहम है क्योंकि पैग़म्बर मुहम्मद जिस ज़मीन पर पैदा हुए जहा इंसान इंसान के खून का प्यासा था,बच्चियों को ज़िंदा दफ़्न किया जाता था,औरतों को पैर की जूती समझा जाता था और औरतों के साथ नाजाइज़ रिश्तों क...

मुस्लिम सियासत और "मुस्लिम समाज"

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एक राजनीतिक पार्टी में मुस्लिम नेता मतलब? कुछ आधार उसका? उसका अहमियत उसकी? चलिये वो अलग बात मगर एक राजनीतिक दल में मुसलमान का होना "मुस्लिम नेता" होना नही है,वहां वो एक दल के लिए मुस्लिमों के लिए नेता नही है,वहां वो बस एक ऐसा नेता है जो किसी भी राजनैतिक दल में एक "मुस्लिम" मात्र है । जो किसी भी राजनैतिक दल में मुस्लिम समाज से आया हुआ है सिर्फ "राजनीतिक" अहमियत के लिए है। इसका सीधा सा मतलब महज़ ये है कि राजनीतिक दल, "सेक्युलर दल" किसी भी ऐसे नेता को अपनी पार्टी में नही लेतें है जो मुस्लिम समाज के "पिछड़ेपन" की बात करें,उसकी समस्या की बात करें और सत्ता में मौजूद पार्टी से न तो सवाल कर सकें और न मांग कर सकें बस वो वहां पर "मुस्लिम प्रतिनिधित्व" के नाम पर आया है । इसी काम को बखूबी लगभग हर एक नेता निभाता भी है,वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सिद्दीकी मुस्लिम नेताओं के बारे में कहते है कि "राजनैतिक दलों को सिर्फ ऐसे मुस्लिम नेता चाहिए जो बस दो बार मुंह खोलें एक पान खाने के लिए दूसरा पान थूकने के लिए" और ये बात हूबहू बिल्कुल सही सिद्ध...

इस कौम को "मुशायरों" से क्या मिला...

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इस कौम को "मुशायरों" ने क्या दिया? क्या दिया इन राजनीतिक मुशायरों ने,जिसकी तैयारीयों में लाखों रुपये खर्च कर 'माहौल' बनाया जाता है,और जिस पार्टी का ये मुशायरा है उस पार्टी के 'नेता' को सेक्युलर बनाया जाता है,क्यों किसलिए कौम के नाम पर "लाखों" रुपये मुशायरों में फूंकें जातें है? क्या मिलता है इससे मुस्लिमों को?क्या मुस्लिम समाज की शिक्षा का स्तर सुधर जाता है? क्या मुस्लिम समाज जिस आधार पर कमज़ोर है बराबर आ जाता है? क्या मुस्लिम बस्तियों में सफ़ाई हो जाती है? क्या मुस्लिम समाज "दलितों से बदतर नही रह जाता है"। हर एक बात का जवाब सभी को पता है,लेकिन फिर भी लाखों रुपये मुस्लिम समाज के नाम पर हर एक बार "सेक्युलर" सरकारें और उसमे मौजूद मुस्लिम "नेता" सारा का सारा खर्च करातें है,और इसके बाद एक मिसाल तय कर दी जाती है कि इस सरकार ने "मुस्लिमों" के हित मे ये किया,और मुस्लिम समाज के "पेट भरे" लोग इस बात को मनवा देतें है कि मुशायरों से कौम को फायदा हुआ है,मगर इस बीच मे इस बात में इन मुशायरों को सुनने आयी भीड़ मे बे...

तस्वीर 2019 की...

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कैसे समझें मौजूदा राजनीतिक स्थिति को? वो स्थिति जो बहुत कुछ बता भी रहीं है,और बहुत अपने अंदर छुपा भी रही है,मगर जो भी है उसकी तस्वीर उसका माहौल सिर्फ और और 2019 के लिए ही है,और यही व...