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तस्वीर 2019 की...

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कैसे समझें मौजूदा राजनीतिक स्थिति को? वो स्थिति जो बहुत कुछ बता भी रहीं है,और बहुत अपने अंदर छुपा भी रही है,मगर जो भी है उसकी तस्वीर उसका माहौल सिर्फ और और 2019 के लिए ही है,और यही व...

"गाँधी" जो आज भी जिंदा है...

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आज  "गांधी" का दिन है,उसी गांधी का दिन जो गांधी का दिन ज़क गांधी देश की आत्मा में बसे है,देश के ख्याल में बसे है और तहज़ीब में बसें है,असल मे आज गांधी के हर एक स्वभाव को याद करने का दिन है जो गांधी जी ने हमेशा अपनाया,क्योंकि आज अगर इसे देश का सबसे ज़्यादा किसी चीज़ की ज़रूरत है तो वो "गांधी" ही है,क्योंकि गांधी बेशक यहां से चले गए थे,लेकिन गांधी यहां हमेशा से जिंदा है और ये भी मत भूलिए की जिस दिन इस देश से "गांधी" खत्म हो गए,उस दिन शायद ये देश ही  न रहें। गांधी असल मे उस शख्सियत का नाम है जो "बहादुर" थे,इतने बहादुर की अपनी मामूली कद काठी और कमज़ोर जिसमे के साथ अंग्रेजों की हुक़ूमत के सामने खड़े हो जातें थे,और उनकी आंखों में आंखों को डालकर कहते थे "अंग्रेजों भारत छोड़ों",इस बहादुरी जैसी मिसाल शायद ही मिल पाए,लेकिन हां वो सकतें थे वो "गांधी" थे,वो बिना हिंसा,बिना पलटवार के "असहयोग आंदोलन" कर सकतें थे,ये बहुत सोचने की बात है कि क्या ये इतना आसान है? यक़ीन मानिये नगी है आसान लेकिन वो गांधी थे कर सकतें थे। असल मे गांध...

मोहर्रम की दसवीं तारीख।

आज मोहर्रम के महीने की दसवीं तारीख है,ये तारीख गवाह है एक ऐसी आवाज़ की जो अव्यवस्था के खिलाफ उठी,जो नाहक़ के खिलाफ उठी और और अव्यवस्था फैलाने वाले नाहक़ के साथ खड़े होने वालों के ...

"हम भारत के लोग"

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हम भारत के लोग,यानी हम भारतीय,130 करोड़ भारतीय वही भारतीय जो अब "आज़ादी" के सत्तर साल पुरे करने जा रहें है,अपने देश के "बड़ों" की विरासत को आगे ले जा रहें है और,दिन दूनी रात चोगुनी तरक्की करने की कामना से काम रहें है,सब अपनी अपनी जगह काम कर रहें है,यानि सब अपना काम कर रहें है,और देश तरक्की भी कर रहा है लेकिन इस आज़ादी के सत्तर सालों के बीच और इस तरक्की के बीच कहीं हम कुछ भूलें तो नहीं है? अगर भूल गएँ है तो क्यूँ न याद कर लें,क्यूंकि देश के लिए चल रहें जश्न में देश ही को याद किया जाएगा ,क्यूंकि जो संविधान हम 130 करोड़ की आबादी को "हम भारत के लोग" कहने की आज़ादी देता है वही सबके बराबर हक को अदा करने की बात को भी कहता है तो चलिए आज़ादी के सत्तर सालों के जश्न के माहोल में कुछ सवाल खुद से ही करते है,क्यूंकि ये सवाल "देश" के लिए है | हम भारतीय बहुत फख्र से खुद को "कृषि" प्रधान देश कहते है और कहा जाना भी ज़रूरी है क्यूंकि हमारे देश में करोड़ों की तादाद में किसान है और खेती करते है,लेकिन क्या "कृषि प्रधान" देश के कृषि करने वालों पर हम ध्यान द...

"मेरी मर्ज़ी "

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"ये बहुत असभ्य है" यानी कुछ गलत है यानी कुछ ऐसा हुआ है की किसी के लिए तो गलत हो रहा है,यानी कुछ ऐसा है जो "समाज" को पसंद नही है,अच्छा ये समाज क्या और केसे है ये बाद में वक़्त निकालकर शायद तय हो जाएँ लेकिन हाँ गलत है,यानी किन्ही दो नौजवानों का ट्रैफिक पुलिस से बच कर निकलना असभ्य है लेकिन सही है क्यूँ चल रहा है लेकिन केसे और क्यों? कुछ,मिसाल के तौर पर किसी चोराहें पर सिगरेट पीता युवक असभ्य है लेकिन एक दायरे के लिए ही तो है,उसके लिए वो उसकी "फ्रीडम" है तो केसे आप उसे असभ्य केसे कह सकतें है? कह ही नही सकतें है क्यूंकि सवाली ही नही उठता है,लेकिन जब उठता है तो फिर? क्या करें? तो एक ऐसा कानून या दायरा तय हो जाएँ जहाँ सब एडजस्ट हो सकें,क्या इसा मुमकिन है ? मान लो कुछ गलत,कुछ अटपटा कुछ असभ्य हो रहा है तो उससे निगाहें नीची रख कर लीजिये,यदि ऐसा हो जाएँ तो आधे से ज्यादा दिक्कत खत्म जाएँ,मगर ऐसा होना इतना आसान है नही,मिसाल के तौर पर मै आपको बहुत आसान मिसाल देता हूँ की किसी मेट्रो सिटी के किसी बड़े कॉलेज के एक जोड़े को देखिये यानी युवक और युवती,जो की आराम से आपको किसी...

विपक्ष में "युवा तुर्क"

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 आज बिहार में भी "एनडीए" की सरकार बन गयी है महागठबंधन का नाता तोड़ नितीश साहब भाजपा के साथ मिलकर छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री बन गये है,और बिहार की जनता के "सम्प्रद्यिक" ताकतों के खिलाफ दिए गए बहुमत को छोड़ चलें गयें है ,खैर ये तो राजनीति है यहाँ इतना बहुत चलता है,लेकिन नितीश बाबु ये भूल गयें है की सत्ता हमेशा नही होती है और चुनावों में तो उन्हें आना ही होगा तब क्या स्थिति होगी? और बात को दूर तक न ही खिंच कर आने वाले लोकसभा चुनाव की ही बात पर ध्यान दे तो नितीश कुमार ने उभरते हुए "विपक्ष" पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है,मगर गौर करने की बात ये है की उत्तर प्रदेश,बिहार और राष्ट्रीय ऐतबार से भी अब विपक्ष में 'युवा तुर्क' आने वाले चुनावों में एक नयी इबारत लिखने को तैयार है,ये युवा तुर्क कोई और नही बल्कि ये "युवा तुर्क" विपक्ष में राहुल गांधी,अखिलेश यादव और अभी अभी नये नये नेता तेजस्वी यादव विपक्ष की ताकत को बढ़ा रहें है जो देखा जाना दिलचस्प होगा,लेकिन इस विपक्ष की स्थिति क्या है इस पर गौर करतें है | राहुल गाँधी- कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और ...

"हम लोग खुदगर्ज़ हो रहें है"

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"हम लोग खुदगर्ज़ हो रहें है " हम लोग,भारतीय लोग,इंडियन लोग 130 करोड़ लोग जिंदा लोग,हिन्दू लोग,मुस्लिम लोग और सिख लोग और इसके अलावा भी तमाम लोग पढ़ें लिखें लोग अनपढ़ लोग और गाँव के लोग अच्छे लोग,बुरे लोग,बड़े लोग और छोटे लोग या इसके अलावा और भी तमाम लोग क्या हम लोग "खुदगर्ज़ हो रहें है?क्या हम सब लोग खुदगर्जी इख्तियार कर चुकें है ? क्या हम लोग इतने ही बुरे हो चुकें है? क्या हम लोग इतने ही भयंकर हो चुकें है सिर्फ अपना ही सोचें? ये सोचने से पहले ही थोडा सा रुक जाइये,थम जाइये और खुद ही से बहुत कुछ पूछिए.. ये "हम भारतीयों" का सवाल इसलिए अहम है क्यूंकि ये पुरे के पुरे पेड़ की कहानी को बयान करने की कहानी है,की जब किसी भी एक पेड़ की खूबसूरती की बातें बताई जाती है तो वो उसकी जड़ों से शुरू होती हुई उसके तने से होती हुई उसकी शाखों तक पहुंचती है,पत्तों तक पहुँचती है,और फिर उसकी सबसे ज्यादा अहम चीज़ उसके फलों तक पहुँचती है,यानी इस पेड़ की हर एक चीज़ खुबसुरत और बेहतर नजर आती है,ये पेड़ हमे छाया देता है,ये पेड़ हमे फल देता है,ये पेड़ हमे 'सांस" देता है,लेकिन सोचिये अगर की...